दीदी के जिस्म की प्यास – Didi Ke jism ki pyaas

दोस्तों आज, में आज आप सभी के लिए एक ऐसी कहानी को लिखने जा रहा हूँ जिसको पढ़ने के बाद आप सभी को पता चलेगा कि किस तरह से एक जवान कुंवारी लड़की अपनी चूत की आग से इतना मजबूर हो जाती है कि वो अपने शरीर की भूख को शांत करने के लिए किसी भी दूसरे मर्द के साथ सोकर उसके साथ अपनी चुदाई करने के लिए तैयार हो जाती है। दोस्तों इससे पहले कि में अपनी इस कहानी को सुनाना शुरू करूं में सबसे पहले आप सभी का परिचय अपने परिवार के लोगो से करा देता हूँ। मेरे परिवार में हम चार लोग है, मेरे पापा मम्मी में और मेरी दीदी। मेरे पापा बाहर दूसरे देश में रहते है क्योंकि उनकी वहां पर नौकरी है इसलिए उनको हम सभी से दूर रहना पढ़ता है और वो एक साल में एक या दो बार ही हम लोगों से मिलने हमारे घर आते है। मेरी दीदी मुंबई में रहती है और में भी उनके साथ ही मुंबई में रहता हूँ और अपनी पढ़ाई को पूरा कर रहा हूँ जब कभी मेरी छुट्टियाँ होती है तब हम दोनों भाई बहन अपने घर चले आते है। अब में आप सभी पढ़ने वालों को उस दिन की घटना के बारे में बताने जा रहा हूँ जिसको देखकर मुझे बिल्कुल भी विश्वास नहीं हुआ और मेरे पैरों के नीचे से जमीन सरक गई।

दोस्तों में आज जो कहानी आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ, वो मेरी दीदी की और मेरे एक दूर के अंकल के साथ किए गये सेक्स की है। दोस्तों उस चुदाई को मैंने खुद अपनी आँखों से अपने सामने होता हुआ देखा था और उसके बाद मुझे पता चला कि में अपनी जिस बड़ी बहन को इतना सीधा समझता था वो बहुत बड़ी रंडी निकली। उसके उस काम को देखकर कुछ देर तक मेरी सांसे ऊपर नीचे होने लगी थी। दोस्तों यह कहानी आज से चार साल पहले की है। दोस्तों उन दिनों में अपनी दीदी के साथ एक छोटे से शहर में चार कमरों का एक मकान लेकर उसमे रहता था, वैसे तो मेरे वो अंकल हमारे यहाँ तभी आते थे जब मेरे पापा हमारे घर आते थे, लेकिन उस दिन शाम को मेरे वो अंकल हमारे यहाँ शाम को आए। फिर मुझे उनको देखकर कुछ अजीब सा लगा, लेकिन उनके यहाँ आने का मतलब मुझे उस रात को पूरी तरह से पता चला। दोस्तों रात को खाना खाने के बाद जब में अपने कमरे में चला गया और फिर में अपने कमरे का दरवाजा बंद करके पढ़ने के लिए बैठा हुआ था और में अपनी पढ़ाई में बहुत व्यस्त था।

फिर करीब आधे घंटे के बाद मैंने अपने सामने वाले कमरे से जिसमे मेरे वो अंकल थे, किसी के बाहर निकलने की आवाज़ सुनी और मैंने उस एक परछाई को मेरी दीदी के कमरे की तरफ जाते हुए देखा। तभी में तुरंत समझ गया कि अब जो कुछ भी होने जा रहा था वो सब कुछ अलग था और फिर में भी बिना देर किए तुरंत अपनी टेबल पर खड़ा हो गया और अपने कमरे के रोशनदान में लगे हुए कांच की खिड़की से जब मैंने मेरी दीदी के कमरे के अंदर झांककर देखा तब मैंने पाया कि जैसे ही मेरे वो अंकल मेरी दीदी के कमरे के अंदर गये, उसी समय उनको देखकर दीदी अपने बेड से उठकर सर पर अपने पल्लू को रखते हुए उनकी तरफ अपनी पीठ को करते हुए खड़ी हो गयी। अब अंकल दीदी के बिल्कुल पास आ गये और वो दीदी से एकदम सटकर खड़े हो गये और फिर दीदी एक कदम आगे बढ़ गयी और तभी अंकल ने दीदी की कमर के ऊपर अपने एक हाथ को रखते हुए, उन्होंने दीदी को अपनी तरफ खींच लिया। अब अंकल ने दीदी के सर से उस आँचल को हटाकर, उनको ज़मीन पर गिरा दिया और अब वो दीदी के एक बूब्स को अपने एक हाथ से बहुत धीरे धीरे आराम से दबाने लगे थे और करीब पांच छ: बार दबाने के बाद अंकल ने अब दीदी के ब्लाउज के हुक को खोलना शुरू कर दिया।

फिर कुछ देर में दीदी के ब्लाउज के सारे बटन को खोलने के बाद अंकल ने ब्लाउज को उतारकर ज़मीन पर नीचे पटक दिया और इसके बाद अंकल ने दीदी की साड़ी को भी धीरे धीरे उतार दिया। अब दीदी के दोनों हाथों को अंकल ने अपने दोनों हाथों से कसकर दबा रखा था और इसके बाद अंकल ने दीदी के पेटीकोट के नाड़े को एक ही झटके में खोल दिया। फिर ऐसा होते ही दीदी का वो पेटीकोट सरककर ज़मीन पर जा पड़ा, जिसकी वजह से अब दीदी बिल्कुल नंगी खड़ी थी, क्योंकि उन्होंने अपने कपड़ो के अंदर ब्रा पेटी नहीं पहनी थी और इसके बाद मैंने देखा कि अंकल ने दीदी के कंधे के पास से बाल को हटाते हुए अपने होंठो को दीदी के दोनों कंधो और गर्दन के बीच धीरे धीरे रगड़ना शुरू किया। फिर उसके बाद वो दीदी के बूब्स को भी धीरे धीरे दबाने के साथ ही दूसरे हाथ से दीदी की चूत को सहलाने लगे और जैसे ही अंकल ने दीदी की चूत को अपने एक हाथ से सहलाना शुरू किया। दोस्तों उसके बाद दीदी तो अपने आपको रोक नहीं सकी और वो तुरंत घूमकर अंकल से लिपट गयी। अब अंकल ने दीदी को अपनी बाहों में उठा लिया और अपनी गोद में उठाकर साथ ले जाकर दीदी को बेड पर लेटा दिया और इसके बाद अंकल ने रूम के दरवाजे को धीरे से बंद कर दिया।

फिर दरवाजा बंद करने के बाद जब अंकल दीदी के पास आए तो साथ में उन्होंने तेल का एक डब्बा भी ले लिया और उसको लेकर टेबल पर रख दिया। अब अंकल ने दीदी की जाँघ को थोड़ा सा फैला दिया क्योंकि उस समय तक दीदी की दोनों जांघे बिल्कुल सटी हुई थी और अब दीदी की चूत पूरी तरह से साफ साफ नजर आ रही थी। फिर अंकल ने उस डब्बे से सरसो के तेल को निकाला और दीदी की नंगी कामुक चूत पर लगाते हुए जब वो दीदी की चूत को अपने एक हाथ से सहलाने लगे थे, उसी समय दीदी ने जोश में आकर अंकल के लंड को उनकी लूँगी से बाहर निकाल दिया, जिसको देखने के बाद मुझे पता चला कि वो करीब आठ इंच लंबा था और एकदम तनकर खड़ा हुआ था। अब उसको अपने हाथ में लेकर दीदी ने भी सहलाना शुरू कर दिया था। फिर मैंने देखा कि मेरी वो चुदक्कड़ कामुक दीदी और चुदाई के लिए पागल अंकल करीब दो मिनट तक ऐसे ही अपने अपने काम को बड़े खुश होकर अंजाम देते रहे। फिर इसके बाद अंकल अब दीदी की जाँघ पर बैठ गये और अंकल ने दीदी की चूत पर अपने लंड को जैसे ही सटाया उसी समय तुरंत दीदी ने अपने दोनों हाथों से अपनी चूत को पूरा फैला दिया।

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अब अंकल ने दीदी की प्यासी चुदाई के लिए तड़पती हुई चूत में अपने लंड को डालने के लिए अपनी कमर को धीरे धीरे से धक्का देकर सरकाना शुरू किया। अब दीदी ने अपनी सांसो को तेज खींचनी शुरू कर दिया और मैंने देखा कि अंकल दीदी की चूत में अपने लंड का टोपा डाल दिया। अब अंकल दीदी के ऊपर लेट गये और उन्होंने अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया और फिर दीदी के मुहं से आअहहहह ऊऊओह्ह्ह आह्ह्हहह उूम्मम्म की आवाज़ निकलने लगी। फिर कभी कभी अंकल ज़ोर ज़ोर के झटके लगाते जिसकी वजह से दीदी पूरी तरह से हिल जाती और दीदी ने अब अपने हाथों को अंकल की पीठ पर रख लिया था और वो अंकल की पीठ को सहला रही थी। अब अंकल दीदी के गालो को चूमने लगे और अपने दोनों हाथों से दीदी के दोनों बूब्स को दबाने लगे थे, जिसकी वजह से दीदी भी मस्ती में आकर आअहह ऊऊओहहह ऊफ्फ्फ बड़ी अजीब ही आवाज़ निकाल रही थी। फिर कुछ देर में बाद अंकल ने अपने आधे लंड को दीदी की चूत में डाल दिया था। अब अंकल ने दीदी के दोनों पैरों को घुमाकर मोड़ लिया और दीदी की दोनों जाँघो को पूरा फैलाते हुए उन्होंने अपने आपको दीदी के दोनों पैरो के बीच में फंसाकर सेट किया और दीदी ने ऐसा करने में उनकी पूरी पूरी मदद की।

अब अंकल ने अपने लंड को एक बार फिर से झटका देना शुरू किया तो दीदी ने अपनी गर्दन को ऊपर उठा उठाकर आहे भरना शुरू कर दिया था। अब अंकल ने दीदी से पूछा क्या तुम्हे ज्यादा तेज दर्द हो रहा है? तभी दीदी से एक अजीब सी आवाज़ में करहाते हुए जबाब दिया उफ्फ्फ नहीं ऊऊईईईईई आहह ओह्ह्ह। अब अंकल ने अपनी कमर को आगे पीछे करके अपने धक्को की स्पीड को पहले से ज्यादा बढ़ा दिया जिसकी वजह से और कुछ ही देर में अंकल का पूरा लंड अब मेरी दीदी की चूत के अंदर जा चुका था। अब दीदी ने भी अंकल का पूरा पूरा साथ देना शुरू कर दिया और वो भी उसके साथ हल्के हल्के धक्के देने लगी थी। मुझे लगातार उनके ऊपर नीचे उठते हुए कूल्हों को देखकर साफ पता चल रहा था कि वो उस समय बहुत जोश में थी और उनको अंकल का लंड अपनी चूत के अंदर बाहर करने में बड़ा मज़ा आ रहा था। फिर कुछ देर के बाद अंकल ने दीदी के नरम गुलाबी होंठो को अपने होंठो में दबा लिया और वो अब अपने लंड को दीदी की चूत में पहले से भी ज्यादा ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर अंदर बाहर अंदर बाहर करने लगे थे।

दोस्तों अब उन दोनों की तरफ से बराबर लगते हुए धक्को को देखकर मुझे साफ पता चलने लगा था कि वो दोनों अपने उस खेल में अब उसकी चरम सीमा पर पहुंच चुके थे और मैंने यह ऐसा ही धक्के देने का चुदाई का सिलसिला पूरे आधे घंटे तक लगातार देखा, एक रुक जाता तो उसके बाद दूसरा धक्के देने लगता और कभी कभी तो वो दोनों ही बराबरी से धक्के दे रहे थे। फिर तब जाकर दोनों वो दोनों बारी बारी से झड़ जाने के बाद शांत हो गए। फिर अंकल झड़ जाने के बाद भी कुछ देर तक ऐसे ही दीदी के ऊपर लेटे रहे और इसके बाद उठकर जब अंकल ने दीदी कि चूत से अपने लंड को बाहर निकाला, तब जाकर दीदी ने अपनी दोनों आँखों को खोला और उन्होंने शरम से मुस्कुराते हुए अपने चेहरे को अपने दोनों हाथों से ढक लिया। अब अंकल ने भी हंसते हुए उनको कहा कि अब इस तरह से चेहरा क्या ढकना है? देखने दो मुझे यह सुंदर मुखड़ा जिसके लिए में पागल हो चुका हूँ ऐसा सुंदर गोरा बदन गोल चेहरा और इतना कामुक बदन मैंने पहले कभी नहीं देखा इसके लिए में कुछ भी करने को तैयार हूँ और फिर अंकल ने दीदी के दोनों हाथों को उनके चेहरे से हटाते हुए उनसे पूछा क्या तुम्हे मेरे साथ यह खेल खेलने में मज़ा नहीं आया?

अब तुरंत ही दीदी ने अपना सर हिलाते हुए जबाब दिया कि हाँ मुझे बहुत मज़ा आया। अब अंकल ने उनके गोल बड़े आकार के बूब्स को अपने दोनों हाथों को गोल गोल घुमाकर सहलाना और कुछ देर बाद उसकी निप्पल को पकड़कर दबाने के बाद अपने मुहं में एक बूब्स को भरकर चूसना शुरू किया। फिर दीदी ने भी जोश में आकर उनके सर को अपनी छाती से दबा लिया, कुछ देर यह सब करने के बाद वो दीदी के ऊपर से हट गये। अब अंकल ने अपनी लूँगी को वापस पहन लिया और बेड से नीचे उतरते हुए कमरे का दरवाजा खोलकर वो वापस अपने कमरे में चले गये। फिर अपने कमरे में जाकर उन्होंने अपने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। अब मैंने देखा कि दीदी कुछ देर तक ऐसे ही लेटी रही और उसके बाद फिर उठकर अपने सारे कपड़े पहन लिए और दोबारा बेड पर जाकर वो सो गयी। दोस्तों में पूरी रात को यह बात जानने के लिए जागता रहा कि क्या अंकल दोबारा से आकर मेरी दीदी के रूम में जाते है या नहीं, हो सकता है कि वो दोनों दोबारा वैसी ही चुदाई के मज़े लेने लगे और इसलिए में थोड़ी थोड़ी देर में उठकर बार बार खिड़की से अपनी दीदी के कमरे में झांककर देखता रहा। दोस्तों जैसा मैंने सोचा था ऐसा, लेकिन अंकल ने नहीं किया।

फिर दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर जब मैंने तुरंत ही अपने कमरे के दरवाजा खोला और में अपने कमरे से बाहर आया, तभी मैंने देखा कि अंकल अब वापस अपने घर जाने के लिए तैयार हो चुके थे। फिर दीदी भी अपने कमरे से बाहर निकलकर मेरे ही सामने रसोई में गयी और वो चाय बनाकर ले आई अंकल ने चाय को उनके हाथ से लेकर पीना शुरू किया और फिर मेरे वो अंकल दीदी को बाय कहकर हमारे घर से चले गये। दोस्तों मेरी दीदी यह बात मन ही मन सोचकर बहुत खुश थी कि मैंने पिछली रात को हुई उनके साथ उस चुदाई की घटना उस खेल को नहीं देखा। दोस्तों सच कहूँ तो में भी यही चाहता था कि उनको यह सब पता ना चले हो सकता है कि दोबारा कभी मुझे उनकी वैसी ही चुदाई को देखने का मौका मिले। दोस्तों वैसे यह पहला मौका था जब मैंने अपनी दीदी को किसी बढ़े आदमी से उनकी इस तरह पागलों जैसी पूरी जोश भरी चुदाई को देखा था और वैसे यह सब मुझे बहुत ही अच्छा लगा था, इसलिए मैंने इसको बड़ी मेहनत से लिखकर आप सभी  के चाहने वालों की सेवा में हाजिर किया है, शायद यह आपको भी अच्छी लगे। अब में जाने की अनुमति चाहता हूँ, लेकिन दोबारा अगर मेरे साथ कुछ हुआ या मैंने कुछ ऐसा देखा जिसको में आपकी सेवा में दोबारा हाजिर कर दूँ तो यह मेरी अच्छी किस्मत होगी ।।

धन्यवाद …

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