पड़ोसन भाभी की चूत की चुदाई करके बुखार उतारा

मेरा नाम अविनाश है, उम्र 22 वर्ष, कद 6 फीट, रंग ठीक-ठाक है। मैं दिल्ली में रहता हूँ, मैं यहाँ जॉब करता हूँ।

यह मेरी पहली कहानी है जो एक माह पूर्व मेरे साथ घटी घटना पर आधारित है। यह बिल्कुल सच्ची आपबीती है बस थोड़ा सा मसाला अतिरिक्त डाल दिया है ताकि आप कहानी का सम्पूर्ण लुत्फ़ ले सकें।

मैं एक साल पहले नॉएडा शिफ्ट हुआ, मैं एक किराये के रूम में रहता हूँ, इस घर में कुल 5 कमरे हैं, मेन गेट से अंदर आकर बायीं तरफ मकान मालिक का बेडरूम है और सामने ड्राइंगरूम। बरामदे के बायीं और बाथरूम और दायीं ओर किचन। पीछे को दो और रूम हैं जिसमे से बाएं वाले में मैं रहता हूँ।

भैया आर्मी में हैं, घर पर भाभी और उनकी एक साल की बेटी नमिता रहती है। भैया के माँ बाप गाँव में रहते हैं, कभी कभार साल भर में आते हैं। अभी तक मैंने उनको दो बार यहाँ देखा है।

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एक साल पहले मैं यहाँ आया या फिर यूँ कहें कि मेरी किस्मत मुझे यहाँ ले आई।

मैं जब यहाँ आया तब काफी शर्मीला था, लड़कियों से ज्यादा बोलता भी नहीं था।

भाभी कभी कभार हंसी मजाक कर लेती थी और मैं मुस्कुराकर जवाब दे देता था।

गली के बहुत सारे लड़के भाभी के दीवाने थे और मुझसे कहते- साले तू पटाता क्यूँ नहीं भाभी को!

पर तब मैं ना इस बारे में सोचता था और ना ही मुझमें लड़की पटाने की हिम्मत थी।

भाभी दिखने में बहुत खूबसूरत हैं पर थोड़ी मोटी, उनका साइज़ लगभग 34 32 38 होगा। एक बात उनको और खूबसूरत बनाती है, वह है उनका रंग, वे बहुत गोरी हैं।

8 मार्च को मैं शाम को 5 बजे रूम पर आया, मैंने चेंज किया। तभी दरवाजे पर खटखट हुई। मैंने दरवाजा खोला तो सामने भाभी थी- अवि क्या मेरे लिये बुखार की दवाई ला दोगे।वह अलसाई सी बोली।

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‘ह्म्म्म क्यूँ क्या हुआ?’ मैं तुरंत बोला। हालाँकि मुझे तुरंत अहसास हुआ कि बुखार की दवाई क्यूँ मंगाई जाती है।

‘हल्का बुखार है।’ वह धीरे से बोली।

‘ठीक है, मैं ले आता हूँ।’ मैं बोला।

चेंज करके मैं सीधे बाहर आया, मेडिकल शॉप पर गया और बुखार की दवाई ली, भाभी को देकर मैं सीधे रूम मैं आ गया।

रात 10 बजे फिर से नॉक हुई। मैं ब्लू फिल्म देख रहा था, मैंने तुरंत वीडियो स्टॉप की और दरवाजा खोला तो सामने भाभी थी- क्या प्लीज मेरे सर पर बाम लगा दोगे?

भाभी को सचमुच बुखार था। हालाँकि मेरी नजर उसके नाईट ड्रेस से बाहर निकल रहे बूब्स पर थी।

मैंने तुरंत खुद को सम्भाला और हल्का सा सर हिला दिया।

भाभी ने मेरे मनोभाव पढ़ लिये थे और बाकी सबकुछ मेरी लोअर में बना तम्बू बयाँ कर रहा था।

मैं भाभी के पीछे पीछे उनकी गांड की लचक को निहारते हुए बेडरूम में पहुंचा। भाभी ने मुझे बाम दिया और खुद लेट गई।

मैं हल्के हाथों से उसके माथे पर बाम लगाने लगा।

धीरे-धीरे भाभी की आँखें बंद होने लगी। मैंने उनके सर पर पानी भिगोकर पट्टी रखी और जाने के लिए उठा। तभी भाभी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और थूक निगलकर बोली- प्लीज यहीं सो जाओ ना!

मेरे पूरे बदन में सिरहन सी दौड़ गई, मैं फिर से दीवार से पीठ सटाकर बैठ गया और भाभी की पट्टी बदलने लगा।

थोड़ी देर में मेरी भी आँख लग गई और मैं सो गया।

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रात को मैंने अचानक हलचल महसूस की और मेरी नींद खुल गई। मैं नींद में बिस्तर के बीच में आ गया था और भाभी मेरी ओर पीठ करके सोई हुई थी और अपनी गांड को पीछे की ओर धकेलकर मेरे बदन पर दबाव बना रही थी।

मैंने सोचा शायद भाभी नींद में होंगी पर लंड पर काबू पाना मुश्किल था। मेरा लंड पूरा तन गया था पर मैंने खुद पर कंट्रोल किया। अब भाभी थोड़ा आगे खिसक गई और मैं भी सोने की कोशिश करने लगा।

थोड़ी देर बाद मैंने देखा भाभी की सलवार आधी गांड तक खुली हुई थी और उसका एक हाथ उसकी चूत को सहला रहा था। हालाँकि अभी भी वह मेरी तरफ पीठ करके सोई हुई थी।

अब लंड पर काबू करना मुश्किल था, मेरा लंड बहुत गर्म हो गया था, मैं हल्के से भाभी की और खिसका और लंड निकालकर उनकी बड़ी गांड की दो फांकों के बीच रखकर दाई टांग उठाकर उसकी टांग के ऊपर रख दी और सोने का नाटक करने लगा।

एक मिनट तक कुछ नहीं हुआ, फिर मैंने महसूस किया कि भाभी अपनी गांड को पीछे की और उचका कर लंड को आमंत्रित कर रही थी। अब मुझसे रहा नहीं गया और भाभी की गांड को हल्का सा उठाकर लंड को गांड के छेद पर सेट कर एक जोर का धक्का मारा।

भाभी ने अपनी गांड उचका ली और जल्दी से छत की और पीठ करके लेट गई।

मैं उसके ऊपर से जल्दी से चढ़ गया और लंड को गांड से निकलने नहीं दिया।

लंड लगभग एक इंच घुस चुका था। गांड टाइट होने के कारण लंड की चमड़ी पलट गई थी और मेरे लंड में तेज चुभन हो रही थी।

भाभी धीरे से फुसफुसाई- प्लीज, आगे से करो ना!

अब मैं उठा और भाभी को सीधा लिटाया, हालाँकि अभी भी उनकी आँखें बंद थी, सलवार और पैंटी उतार कर एक तरफ कर दी और टांगों के बीच आ गया।

गुलाबी चूत मेरे सामने थी, चूत पर हल्के हल्के बाल थे, मैं अपनी जीभ निकाल कर हल्के हल्के चूत को चाटने लगा।

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भाभी की हल्की हल्की सिसकारियाँ निकलने लगी। भाभी अपने चूतड़ों को हल्का हल्का उछलने लगी और फिर दोनों जांघों से जोर से मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा दिया और चिल्लाते हुए झरने लगी- आह आसह उम्म्ह… अहह… हय… याह… आहाहाह आअह आय्य्याआ ह्ह्ह आअह्ह!

और फिर शांत हो गई।

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पर मेरा काम अभी बाकी था, मैंने लंड को चूत पर सेट किया और हल्के हल्के अंदर डाला। मैं बहुत उत्तेजित हो चुका था, आधा अंदर जाते ही चूत की गर्मी ने अपना प्रभाव दिखाया और मैं जोर जोर से झड़ने लगा।

यह मेरा पहली बार था, मुझे लगा जैसे मेरे अंदर से सब कुछ निकल गया हो।

हम 10 मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे और फिर दस मिनट बाद लंड फिर से तैयार था। मैंने हल्के से लंड को पहले बाहर निकला और फिर एक ही झटके में पूरा लंड चूत में घुसा दिया।

भाभी चिल्ला उठी- आहह आऐई ईईईइ सस्स्याआह आह्ह्ह।

जोर के झटके से भाभी की पाद निकल गई।

मैं भाभी को मुंह पर किस करने लगा और उनके गोल और भारी उरोजों को मसलने लगा। भाभी के मखमली और गुदगुदे बूब्स चूसने लगा।

थोड़ी देर में भाभी अपनी भारी गांड धीरे धीरे उचकाने लगी, मैंने भी हल्के हल्के लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और 2 मिनट तक ऐसे ही चोदता रहा- आआह ऊउईई म्माआ आआह्ह!

भाभी की हल्की सिसकारियाँ मेरे जोश को दुगुना कर रही थी और फिर मैंने स्पीड बढ़ा दी और भाभी की वो हाहाकारी चुदाई की जिसका उनका बेड आज भी गवाह है जो एक कोने से हल्का टूट गया था।

15 मिनट तक चोदने के बाद मैं झड़ गया और पूरा लावा भाभी की गुफा में समा गया और बाकी मैंने चूत के मुहाने पर छोड़ दिया।

फिर मैं चुपचाप अपने रूम में आकर सो गया।

अब मैं नॉएडा शिफ्ट हो गया हूँ पर भाभी के नाम की आज भी मुठ मारता हूँ।

मेरी हिंदी सेक्सी स्टोरी पर अपनी प्रतिक्रिया मुझे जरूर भेजें।

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