बुआ की पड़ोसन को तेल लगाकर चोदा | Bhua Ki Padosan ko tel laga kar choda

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम बॉबी है और में कैथल हरियाणा का रहने वाला हूँ| मैंने अब तक बहुत सी कहानियों को पढ़ा है क्योंकि यह सभी कहानियाँ हम सभी का बहुत अच्छी तरह से मनोरंजन कर देती है और यह मेरा मन कहता है। दोस्तों में भी आज आप सभी को अपनी एक सच्ची घटना सुनाने आया हूँ जो बिल्कुल सच है और अब आप उसको सुनिए और मज़े लीजिए। दोस्तों में एक कॉलेज का छात्र हूँ और मेरा सेमेस्टर सिस्टम होने की वजह छुटियाँ बहुत कम होती है और फिर मुझे मेरे पेपर से पहले छुट्टियों में कुछ दिनों के लिए मेरी बुआ जी के पास जाने का मौका मिला और में बता दूँ कि मेरी बुआ करनाल में रहती है इसलिए में उनको मिलने करनाल चला गया। दोस्तों में वहां पर उनके पास बस दो तीन दिन के लिए गया था, लेकिन फिर मेरे बहुत दिनों के बाद उनसे मिलने की वजह से मेरी बुआ जी ने मुझे अपने पास ही और कुछ दिनों के लिए रोक लिया और में भी वहीं पर रुक गया। दोस्तों उन्ही दिनों मेरी बुआ जी के पड़ोस में एक सिख परिवार किराए से उस एक मकान में रहने आया, उस परिवार में एक बड़ी सुंदर सी प्यारी सी लड़की भी थी। दोस्तों जिसका नाम गुरदीप कौर था।
दोस्तों में आप सभी को उस लड़की के बारे में क्या बताऊँ? में बस इतना सा कह सकता हूँ कि वो एक बहुत ही सुंदर गोरी अच्छी दिखने वाली शरीफ लड़की थी और उसका चेहरा बड़ा ही बेदाग रंग बहुत ही साफ, उसका कद करीब 5.7 इंच उसके बूब्स का आकार करीब 34-36 इंच रहा होगा। दोस्तों अब आप ही सोच लीजिए वो दिखने में कैसी लगती होगी? अब में थोड़ा अपने बारे में भी बता देता हूँ, मेरी लम्बाई 6.1 इंच है और मेरा लंड इतना लंबा और मोटा है कि किसी भी असंतुष्ट को भी पहली चुदाई के बड़ी आसानी से संतुष्ट कर दे। दोस्तों अब में सीधा मुद्दे की बात पर आता हूँ। फिर मैंने उस लड़की को मेरे करनाल पहुंच जाने के दूसरे दिन पहली बार देखा था, लेकिन वो भी मुझे बस उसका पिछला हिस्सा ही मुझे नजर आया था और इसलिए मैंने उस लड़की में इतनी कोई रूचि नहीं ली थी। दोस्तों क्योंकि अब तक मुझे उसका वो सुंदर आकर्षक चेहरा और उसका गोरा हॉट सेक्सी बदन जो नजर नहीं आया था। फिर अगले दिन अचानक ही किसी काम से मुझे उनके घर जाना पड़ा और मैंने तब पहली बार वहां पर उसको बड़े ध्यान से देखा था और में बहुत चकित था, लेकिन फिर भी जैसे तैसे अपने मन को काबू में करके अपने उस काम को खत्म करके वहां से निकल गया।
दोस्तों मेरे मन में अब भी उस लड़की के लिए कोई भी गलत बात नहीं थी, क्योंकि अगले दिन मुझे अपने घर भी वापस आना था, लेकिन बुआ जी ने मुझे जिद करके अपने पास ही रोक लिया और में भी हंसी खुशी उनके पास ही रुक गया, क्योंकि वैसे चाहता तो मेरा मन भी यही था। फिर उसी दिन शाम को सभी लोग गली में बैठकर बातें कर रहे थे और में अपनी बुआ के घर के अंदर टीवी पर क्रिकेट मेच देख रहा था, लेकिन कुछ देर के बाद ही बिजली चली गई। अब में भी घर से बाहर आ गया। दोस्तों मेरी बुआ जी की कोई औलाद नहीं है इसलिए वो मुझे हमेशा बहुत प्यार करती है और फिर में उन्ही के पास आकर बैठ गया, मैंने सुना कि सभी के बीच इधर उधर की कुछ बातें चल ही रही थी, तभी गुरदीप ने मेरी तरफ मुस्कुरा दिया। फिर मैंने भी अपनी तरफ से जवाब में उसकी तरफ मुस्कुरा दिया। अब में अच्छी तरह से समझ चुका था कि वो मुझे थोड़ा बहुत पसंद करती है और फिर ऐसे ही इधर उधर की बातें होती रही। दोस्तों रात को करीब आठ बजे हम दोनों गली में एक साथ खड़े थे कि तभी एक आईस्क्रीम वाला आ गया।
फिर मैंने उसको मेरी तरफ से आईस्क्रीम खाने के लिए पूछा और बस वहीं से हम दोनों की दोस्ती की कहानी शुरू हुई, लेकिन मेरे दिल में उसके लिए कोई भी पाप नहीं था। फिर बस ऐसे ही चलता रहा और अब में उसके साथ अकेले में भी मिलना चाहता था, लेकिन हम दोनों को ऐसा कोई भी मौका नहीं मिला था। एक दिन मुझे मेरी अच्छी किस्मत से वो मौका मिल ही गया, हमारे पड़ोस में एक सत्संग चल रहा था इसलिए सभी लोग वहीं पर गए हुए थे और में अपने घर पर ही अकेला रह गया था। फिर मुझे लगा कि शायद गुरदीप भी वहीं सत्संग में गयी होगी इसलिए में अकेले घर में बैठे टीवी देखने लगा था। फिर कुछ देर बाद में वैसे ही अपने घर से बाहर निकला तो उस समय मैंने देखा कि गुरदीप उस तेज धूप में बाहर खड़ी हुई थी। अब मैंने उसको अंदर आने को कहा, लेकिन उसने आने से साफ मना कर दिया और मैंने एक बार फिर से उसको आने के लिए कहा तब जकड़ वो मान गयी। अब वो घर के अंदर आकर सोफे पर बैठ गयी और में फ्रिज से हमारे लिए ठंडा लेने चला गया और फिर वापस आकर हम दोनों उसको पीते हुए बातें करने लगे। फिर कुछ देर उसके साथ बातों को करते हुए ही मैंने हिम्मत करके उसको पूछ लिया क्या तुम्हे सेक्स करना पसंद है? उसने यह बात सुनकर तुरंत ही अपनी आँखों को फेर लिया।
फिर मैंने उसका एक हाथ अपने हाथ में ले लिया। अब उसने थोड़ा सा गुस्से में आकर मुझसे कहा यह सब क्या बदतमीजी है?
में : अच्छा यह बदतमीजी है क्या?
गुरदीप : हाँ और नहीं तो क्या है? घर आए मेहमान से क्या ऐसे पेश आते है?
अब मैंने तुरंत उसका हाथ छोड़ दिया और वो मेरी इस हरकत की वजह से ज़ोर से हंसने लगी। फिर मैंने उसको पूछा क्यों अब क्या हुआ, जो तुम मुझे ऐसे देख रही हो? तभी वो मुझसे कहने लगी कि बुद्दू राजा एक बार किसी लड़की का हाथ पकड़कर वापस इस तरह से नहीं छोड़ते है। अब में उसकी आँखों में आँखें डालकर देख रहा था और मुझे उसकी आँखों में अजीब सी कशिश नजर आ रही थी, जो मुझे अब बिल्कुल दीवाना कर चुकी थी। अब उसने मुझसे पूछा कि आपकी बुआ जी आज कहाँ गई है? मैंने उसको कहा कि जहाँ पर आपकी माता जी गई है। अब वो यह बात सुनकर खुश होकर कहने लगी ओह फिर तो वो भी शाम को ही वापस आएँगी क्या तुमने खाना खा लिया? फिर मैंने उसको कहा कि हाँ खा लिया और वो लगातार मुझे देखती ही रही और उसका मुझे देखने का अंदाज कुछ ऐसा था मानो जैसे वो अभी मेरा कत्ल कर देगी। अब मेरा ध्यान उसके बूब्स की तरफ चला गया जिसकी वजह से मेरे अंदर का वो शैतान जाग गया, हालाँकि मैंने कभी सेक्स नहीं किया था, लेकिन मुझे उसके बारे में सारा सब कुछ पता था। फिर में खड़ा हो गया और मैंने उसका हाथ पकड़कर उसके पास बैठ गया और कुछ देर एक दूसरे को हम दोनों बिना बोले देखते रहे। अब मैंने उसको कहा कि तुम अब अपनी आँखों को बंद करो, में तुम्हारे लिए एक उपहार लेकर आया हूँ।
फिर वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर खुश हो गई और उसने उत्साहित होकर अपनी दोनों आँखों को बंद कर लिया और अब क्या था? में तुरंत उसके सामने आ गया और मैंने उसको ज़ोर से अपनी बाहों में भरकर एक बड़ा प्यारा सा चुम्मा दे दिया, जिसकी वजह से वो मेरी बाहों में मचलने लगी थी और अपने आप को मुझसे छुड़ाने की कोशिश लगी और उसका चेहरा गुस्से से एकदम लाल हो चुका था, लेकिन वो मुझसे बोल कुछ नहीं रही थी। फिर मैंने भी कुछ देर उसको छोड़ दिया, जिसकी वजह से अब वो थोड़ा सा शांत हो चुकी थी। अब वो मुझसे कहने लगी यह सब क्या था?
में : वही जो एक जवान लड़के और सुंदर लड़की के बीच होता है।
गुरदीप : हाँ वो सब तो तुम्हारा कहना ठीक है, लेकिन यह सब ठीक नहीं है बहुत गंदी गलत बात है।
में : तो फिर तू ही मुझे बताओ कि क्या ठीक है? मुझे भी तो पता चले।
गुरदिप : अगर किसी को पता चल गया तो क्या हो सकता है तुम्हे इस बात का अंदाजा भी है?
में : अच्छा, इसका मतलब तुम यह बात सबको बताना चाहती हो?
गुरदिप : नहीं में क्यों बताने लगी, मुझे क्या मरना है सबको यह सब बताकर?
में : तो फिर इस सभी के बारे में किसी को कैसे चलेगा?
अब वो मेरे मुहं से यह सब बातें सुनकर थोड़ी सी शांत हो गई और मैंने सही मौका देखकर एक बार फिर से उसको अपनी बाहों में भर लिया और में धीरे से उसको चूमने प्यार करने लगा था, लेकिन उसकी तरफ से मुझे थोड़ा सा भी साथ नहीं मिल रहा था। अब मैंने उसको पूछा क्यों क्या तुम्हे कोई आपत्ति है मेरे साथ यह सब करने में? वो कहने लगी कि नहीं बस वैसे ही मैंने पहले कभी यह सब किया नहीं ना इसलिए मुझे थोड़ा सा डर लग रहा है। अब मैंने हंसते हुए उसको कहा कि तो में कौन सा हर रोज किसी के साथ ऐसा सब करता हूँ और फिर वो थोड़ी सी मान गई। फिर मैंने उसके माथे पर चूम लिया और उसके बाद में उसके होंठो पर भी चूमने लगा, जिसकी वजह से उसके शरीर में कम्पन सी हुई और मुझे उसने अपनी बाहों में जकड़ लिया और दोनों मदहोश होकर एक दूसरे में खोकर करीब दो मिनट तक वैसे ही प्यार करते रहे। दोस्तों मैंने उसको चूमने के दौरान ही उसके बूब्स पर अपने एक हाथ को रख दिया और उसकी वजह से उसकी सांसे तभी अचानक ही तेज हो गयी और अब में उसकी सांसो की गरमी को भी भली भांति से महसूस कर रहा था। अब वैसे मेरा लंड भी इतना सब उसके साथ हो जाने की वजह से तनकर खड़ा हो चुका था और मेरे लंड को भी उसके शरीर को छू जाने की वजह से अब जोश आ चुका था
फिर मैंने उसके बूब्स को कपड़ो के ऊपर से ही दबाने शुरू किए, लेकिन कुछ देर बाद उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और वो मुझसे कहने लगी कि यह तुम क्या कर रहे हो? में अब उसको कुछ नहीं बोला और मैंने उसके बूब्स के उठे हुए निप्पल को अपने एक हाथ से रगड़ दिया, जिसकी वजह से वो सीईई करने लगी। अब में उसको बेड की तरफ़ ले गया और मैंने उसको लेटा दिया। उसके बाद में दोबारा उसको चूमने प्यार करने लगा और अब वो भी मेरी दीवानगी में खो गयी थी। फिर मैंने कपड़ो में ही उसके पूरे शरीर पर अपने हाथ को फेरना शुरू किया और वो जोश मस्ती की वजह से बिन पानी की मछली की तरह मचल रही थी। अब में उसके बूब्स कपड़ो के ऊपर से ही चूसने दबाने लगा था, लेकिन अब उसके बस में कुछ भी नहीं था। फिर में अपना हाथ धीरे धीरे नीचे ले गया और उसकी चूत पर रख दिया जिसकी वजह से वो डरते हुए सहम सी गयी, लेकिन उसने कहा कुछ भी नहीं। अब में दोबारा उसको चूमने लगा था और अब वो भी मेरा उस काम में पूरा साथ दे रही थी। फिर मैंने सही मौका देखकर उसकी कमीज़ को उतार दिया, जिसकी वजह से अब वो मेरे सामने ब्रा और सलवार में थी।
दोस्तों मैंने देखा कि उसका रंग एकदम शीशे की तरह साफ था। उसके बदन में कोई भी दाग नहीं था और में अब उसमे पूरी तरह से डूब जाना चाहता था। फिर मैंने उसकी काली रंग की ब्रा को भी उतार दिया जिसकी वजह से अब वो मेरे सामने अधनंगी थी और मैंने उसकि छाती पर बूब्स को दबाने के लिए अपने एक हाथ को रखा, तब मैंने महसूस किया कि उसका दिल बहुत ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था और उसकी दोनों आंखे बंद थी। अब मैंने उसकी गर्दन पर चुम्मा किया और फिर में उसके बूब्स से खेलने लगा और अब वो मज़े मस्ती की वजह से इस दुनिया में नहीं थी और उसको पता ही नहीं चल रहा था कि हो क्या रहा है? अब में धीरे धीरे नीचे की तरफ आने लगा और मैंने अपना हाथ एक बार फिर से उसकी चूत पर रख दिया, जिसकी वजह से वो एक बार फिर से मचलने लगी और वो मेरा हाथ पकड़ने लगी। अब मैंने अपने हाथ को उससे छुड़ाकर तुरंत ही उसकी सलवार को भी उतार दिया, जिसकी वजह से अब वो मेरे सामने सिर्फ़ पेंटी में थी और में उसके सामने अपने पूरे कपड़ो में था।
फिर मैंने बिना देर किए उसकी पेंटी को भी उतार दिया, हाए राम में क्या बताऊँ आप सभी को? में उसको पहली बार अपने सामने पूरी नंगी देखकर सब कुछ भूल चुका था, क्योंकि मैंने देखा कि उसकी उस कुंवारी चूत पर एक भी बाल नहीं था। उसका आकार छोटा था, लेकिन फिर भी वो बड़ी सुंदर लग रही थी। फिर मैंने उसकी नंगी चूत पर अपना हाथ लगाकर उसकी चूत को सहलाया तो वो एकदम से तिलमिला उठी और जोश की वजह से उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। अब मैंने भी बिना देर किए अपने सारे कपड़े उतार दिए, मैंने देखा कि उसकी दोनों ऑंखें अब भी बंद ही थी और उसने मेरा आठ इंच का लंबा मोटा लंड भी तक नहीं देखा था। फिर मैंने उसके दोनों पैरों को पूरा फैलाकर उसकी चूत की पंखुड़ियो पर तुरंत अपने होंठ रख दिए, जिसकी वजह से वो एकदम धीरे से चिल्ला पड़ी आईई ऊह्ह्ह। दोस्तों में अब उसकी गुलाबी रसभरी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा था और उसको और भी ज्यादा मदहोश करने लगा था और अब उसके मुँह से बड़ी अजीब सी आवाज़े आ रही थी। अब में उसको चोदना चाहता था, लेकिन पहले कभी सेक्स ना करने की वजह से मुझे ज्यादा कुछ उसके बारे में पता नहीं था।
फिर में उसके दोनों पैरों के बीच में आ गया और मैंने अपने लंड का अगला हिस्सा उसकी खुली चूत के मुँह पर रख दिया, तभी अचानक से उसने अपनी आँख खोली। अब वो मेरा लंड देखकर डर गयी और वो मुझसे कहने लगी कि यह अंदर नहीं जाएगा। फिर मैंने उससे कहा कि अगर यह अंदर नहीं गया तो मजा भी नहीं आएगा उसके बिना यह सब काम अधूरा ही रह जाएगा। अब वो कहने लगी हाँ ठीक है, लेकिन तुम इस बात का भी ध्यान रखना इसकी वजह से मुझे बड़ा तेज दर्द होने वाला है इसलिए तुम इसको धीरे से ही अंदर डालना, ज्यादा जल्दबाजी मत करना। फिर जब में अपने लंड को उसकी चूत के अंदर डालने लगा, तब वो अंदर नहीं जा रहा था, क्योंकि उसकी चूत अब तक वर्जिन थी इसलिए वो बहुत टाईट और में भी उस समय बहुत जोश में था इसलिए मुझे पता था कि उसकी चूत में लंड डालते ही खून जरुर आएगा। फिर इसलिए मैंने पहले से ही एक फटा पुराना कपड़ा उसके कूल्हों के नीचे रखने के लिए ढूँढ लिया था। फिर मैंने अपने लंड पर बहुत सारा सरसों का तेल लगाकर अपने लंड को बहुत चिकना कर लिया और अब थोड़ा सा तेल मैंने उसकी चूत पर भी लगाकर उसको भी चिकना कर दिया।
अब मैंने धीरे से अपने लंड को दोबारा उसकी चूत के उस छोटे से छेद पर रखकर एक धक्का मार दिया, जिसकी वजह से उसकी चूत में मेरे लंड का टोपा अंदर चला गया और बस इतने में ही वो ज़ोर से चिल्ला पड़ी ऊईईईईई माँ में मर गई ऊउईईईईई मुझे बड़ा तेज दर्द हो रहा है। तभी मैंने तुरंत ही उसके होंठो पर अपने होंठ रखकर उसकी आवाज को अंदर ही दबा दिया और फिर धीरे से मैंने एक और धक्का लगा दिया, जिसकी वजह से वो तो एकदम तड़प उठी और मेरी नंगी पीठ पर उसने अपने दोनों हाथों के नाखूनों को चुभो दिया और उस दर्द की वजह से उसकी आँखों में आँसू आ गये। दोस्तों वो चिल्लाना चीखना चाहती थी, लेकिन मैंने उसके होंठ नहीं छोड़े और में ऐसे ही कुछ देर उसके ऊपर बिना धक्के दिए लेटा रहा और वो कुछ देर बाद थोड़ी सी शांत हो गई। अब में उसके बूब्स को चूसने लगा और उसके बदन को अपने हाथ से सहलाने भी लगा था, जिसकी वजह से उसको अब कुछ अच्छा महसूस होने लगा था और इसी बीच मैंने सही मौका देखकर एक ही झटके में अपना पूरा लंड उसकी चूत के अंदर डाल दिया। अब वो दोबारा से चीखना चाहती थी, लेकिन ऐसा कर ना सकी और अब में उसके बूब्स को पागलों की तरह लगातार चूसने और उसके पूरे बदन को सहलाने लगा था, जिसकी वजह से उसको उस दर्द का एहसास ज्यादा ना हो।
फिर कुछ देर बाद जब वो शांत होने लगी तब मैंने उसको धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किए और अब वो थोड़ा सा अच्छा महसूस कर रही थी और करीब 10-15 धक्के देने के बाद अब वो भी मेरा साथ देने लगी थी। फिर थोड़ी ही देर के बाद उसके शरीर में एक अजीब सी हरकत हुई और मुझे उसने कसकर अपनी छाती से लगा लिया और फिर उसके बाद वो एकदम से शांत हो गई। अब में तुरंत समझ गया कि वो झड़ चुकी है उसके माथे से पसीना बहने लगा था वो एकदम ठंडी होकर वैसे ही पड़ी रही जैसे उसके शरीर में अब बिल्कुल भी जान नहीं है। फिर करीब दो मिनट लगातार धक्के देने के बाद में भी झड़ गया और में अपने लंड को उसकी चूत के अंदर ही डाले हुए उसके ऊपर लेट गया। अब मैंने देखा कि उसके चेहरे पर एक अजीब सी ख़ुशी थी और में यह सब कुछ देखकर मन ही मन बहुत खुश हुआ कि मेरा पहला सेक्स अनुभव बहुत अच्छा रहा। फिर कुछ देर बाद हम दोनों उठकर बाथरूम में एक साथ नहाने चले गये और हम दोनों नहाकर बाहर आए और हम दोनों बड़े खुश थे हमारे उस पहले सेक्स अनुभव की वजह से। फिर उसके बाद वो अपने घर पर जाते समय बाहर फेंकने के लिए वो पुराना कपड़ा जो चुदाई की वजह से निकले खून की वजह से लथपथ था उसको अपने साथ ही ले गयी और उसने अपने घर जाते समय उसको भी कहीं बाहर फेंक दिया। दोस्तों यह थी मेरी एकदम सच्ची कहानी आप सभी को यह कैसी लगी में नहीं बता सकता, लेकिन मुझे वो चुदाई करके बड़ा मस्त मज़ा आया ।।
धन्यवाद …

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