माँ की ममता | Maa Ki Mamta ka fayeda uthaya || Hindi Desi Sex Story || Gandi kahaniya by Mastram

प्रेषक : गुमनाम …

हैल्लो दोस्तों, आज में आप सभी को अपनी एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ और यह मेरा वो अनुभव है जिसको में अभी तक नहीं भुला सका, क्योंकि यह एक सच्ची कहानी है। दोस्तों इसलिए में भी चाहता हूँ कि इसको में आप लोगों तक पहुंचा दूँ और अपने मन की उस बात को बता दूँ जिसको में अपने मन में रखकर बैठा हूँ। दोस्तों में पिछले कुछ समय से कामुकता डॉट कॉम की सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ जिनको पढ़कर मैंने अब तक बड़े मज़े किए, लेकिन अपनी कहानी को लिखकर आप तक पहुँचाने की हिम्मत मुझे आज मिली है और अब बिना समय खराब किए में अपनी कहानी को आगे बढ़ाता हूँ।


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दोस्तों यह बात तब की है जब में 10th क्लास में पड़ता था, एक दिन स्कूल में अपनी क्लास में एक बेंच के ऊपर से ऊँची कूद लगाते समय में ऐसे नीचे गिरा कि उस बेंच का कोना मेरे लंड और आंड के बीच में घुस गया जिसकी वजह से मुझे उस जगह से बहुत सारा खून निकला। में कुछ देर बाद अपने स्कूल से छुट्टी लेकर अपने घर पर पहुंच गया, उस दिन मेरे पापा घर पर नहीं थे, वो अपनी कंपनी के काम से कहीं बाहर गए हुए थे और उस वजह से मेरी माँ घर में अकेली थी, तो मैंने अपने घर पर पहुंचकर सारी बातें अपनी माँ को बताई तो वो मेरी बातें सुनकर बहुत ज्यादा घबरा गयी, इसलिए वो फटाफट से मुझे कमरे के अंदर में ले गई और उन्होंने तुरंत मेरी पेंट और अंडरवियर दोनों को ही उतारकर मुझे सीधा लेटा दिया। फिर वो मेरा लंड अपने हाथ में लेकर उसको धीरे धीरे ऊपर नीचे करके देखने लगी और लंड के नीचे लगी उस चोट को देखकर वो डर गई और उसके बाद वो मुझे पास ही के डॉक्टर के पास ले गई। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर डॉक्टर ने मम्मी से कहा कि यह जगह ऐसी है कि इस जगह पर ना तो टाँके लग सकते हैं और ना ही पट्टी हो सकती है इसलिए उसने दवाई लिख दी और उन्होंने माँ से कहा कि लगातार दस दिनों तक हर एक घंटे के बाद इस जगह को साफ करके यहाँ पर यह दवाई लगानी बहुत ज़रूरी है। फिर हम दोनों उनकी सभी बातें सुनकर अपने घर आ गए और घर आने के बाद माँ ने जल्दी से मेरे कपड़े उतार दिए और वो मेरा पूरा ध्यान रखने लगी। में सारा दिन और रात नंगा ही लेटा रहता और माँ हर एक घंटे के बाद वो मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर उसकी साफ सफाई करती और फिर उस जगह पर दवाई लगा देती और रात में भी वो मेरे साथ ही सो जाती, लेकिन वो दवाई लगानी नहीं भूलती। इस तरह आठ दिन निकल गए, लेकिन उन्ही दिनों फोन पर मम्मी से डॉक्टर ने कहा कि कहीं इस चोट से मेरे लंड में अंधरूनी समस्या या लंड के उठने में कोई असर ना हो गया हो? तो डॉक्टर की वो बात सुनकर माँ बहुत टेंशन में आ गई और इस वजह से उस रात को जब हम दोनों सोने लगे तो माँ जानबूझ कर सिर्फ़ ब्लाउज और पेटिकोट में बिस्तर में आ गई और उस समय उनके ब्लाउज के ऊपर वाले दो बटन भी खुले हुए थे, जिसमें से माँ के बूब्स मुझे साफ साफ दिखाई दे रहे थे, लेकिन थोड़ा दर्द होने की वजह से में उस तरफ इतना ध्यान नहीं दे पा रहा था जिससे माँ को और भी चिंता हो गयी। फिर दूसरे दिन सुबह वो मुझे नहलाने के लिए बाथरूम में ले गई और अब में बाथरूम में तो पूरा नंगा खड़ा था और वो सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में ही बाथरूम के अंदर आ गई उन्होंने मेरे पूरे बदन पर साबुन लगा दिया और उसके बाद पानी डाला मुझे नहलाया और फिर वो मुझे वापस कमरे में ले गई और उसके बाद वो मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी, जिसकी वजह से मुझे कुछ कुछ हो रहा था। तभी उन्होंने अपनी ब्रा को उतार दिया, जिसकी वजह से उनके बड़े बड़े नंगे गोरे बूब्स मेरे सामने थे, जिसकी वजह से मेरे लंड को बहुत ज़ोर का झटका लगा। फिर वो अपनी ब्रा से मेरे लंड को सुखानी लगी मेरा लंड अब धीरे धीरे टाइट होकर अपना आकार बड़ा कर रहा था। उसके बाद माँ ने मेरे लंड को रगड़ना सहलाना शुरू कर दिया और फिर कुछ देर बाद वो मेरे लंड को अपने मुहं में लेकर चूसने लगी, जिसकी वजह से मुझे भी बहुत मज़ा आने लगा था। फिर उन्होंने अपना पेटिकोट भी उतार दिया और वो मेरे ऊपर आकर मेरे लंड पर बैठ गई, मेरा लंड जो अब तनकर 6 इंच का हो गया था पूरा का पूरा उनकी गीली गरम चूत में फिसलता हुआ अंदर जा चुका था और बहुत देर तक धक्के मारने के बाद मेरे लंड से वीर्य बाहर निकला और अब मेरी माँ की खुशी का कोई ठिकाना ना रहा, वो बहुत खुश नजर आ रही थी और मुझे उनके चेहरे से उनकी ख़ुशी का पता चल रहा था और उनका वो चेहरा देखकर में भी खुश था। फिर अपनी चूत से मेरे लंड को बाहर निकालकर उन्होंने चूमना शुरू कर दिया और दोबारा अपने मुहं में लेकर लंड को चूसने लगी थी, जिसकी वजह से अब मेरी भी हिम्मत बहुत ज्यादा बढ़ गयी थी। फिर मैंने भी उस समय का ठीक ठीक फायदा उठाते हुए अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर अपनी मम्मी के बूब्स को पकड़ लिए और तब मैंने महसूस किया कि वो बहुत मुलायम गरम थे और अब में उनको दबाने सहलाने लगा और फिर कुछ देर बाद उन्होंने अपने निप्पल को मेरे मुहं में लगा दिए और में उनके बूब्स को चूसने लगा।

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फिर कुछ देर बाद वो मुझे नीचे करके अपनी चूत को चटाने लगी और कुछ देर चाटने चूसने के बाद मेरा लंड एक बार फिर से चुदाई के लिए तैयार हो गया था। अब मैंने उनको नीचे लेटाकर अपना लंड चूत के मुहं पर रखकर एक जोरदार धक्का देकर पूरा का पूरा लंड उनकी चूत में डाल दिया और चुदाई करने लगा और कुछ देर लगातार धक्के के बाद मैंने अपने लंड का वीर्य दूसरी बार भी उनकी चूत में छोड़ दिया, लेकिन मेरा लंड अभी भी तनकर खड़ा था और यह देखकर माँ अब तुरंत पलटकर लेट गई और फिर मैंने अपना लंड उनकी टाइट गांड में डाल दिया और में धक्के देने लगा, लेकिन मेरे तीसरी बार झड़ जाने के बाद हम दोनों अब बहुत थक चुके थे, लकिन यह शायद हमारे उस काम की शुरुआत थी। दोस्तों यह था मेरा वो पहला सच्चा अनुभव जिसको में आप लोगों के लिए लेकर आया हूँ ।।

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धन्यवाद …

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