स्टेशन के बाहर मिली अनजान भाभी की चुत चुदाई उसके घर में

एक रात को मैं काम से लेट नाइट आ रहा था, उस वक्त कुछ 11 बजे थे।
मैं स्टेशन से बाहर निकला तो देखा कोई नहीं दिखाई दे रहा था.. एकदम सन्नाटा छाया हुआ था। मैं आगे को आया तो देखा 25-27 साल की शादीशुदा लड़की खड़ी थी। मैं कुछ नहीं बोला और आगे बढ़ गया।
थोड़ी दूर चलने के बाद मुझे उसने पीछे से आवाज़ दी, मैंने पीछे मुड़कर देखा तो वो लड़की मुझे बुला रही थी।
मैं रुक गया.. और पूछने लगा- क्या हुआ?
वो बोली- क्या मैं आपके साथ चल सकती हूँ?
मैंने कहा- हाँ..
अब हम दोनों साथ चलने लगे।
थोड़ी देर चुप रहने के बाद मैंने पूछा- आप इतनी रात में कहाँ से आ रही हैं?
वो बोली- ऑफिस में देर हो गई थी।
उससे बातें हुईं तो उसने अपना नाम सीमा बताया, हम दोनों बात करते करते कुछ आगे आ गए।
मैंने पूछा- तुम तो शादीशुदा हो.. तुम्हारे पति कहाँ हैं?
तो बोली- वो ऑफिस के काम से पुणे गया है।
तभी अचानक एक कुत्ता पीछे से जोर से भौंकने लगा.. सीमा ने डर के मारे मेरा हाथ जोर से पकड़ लिया और मेरे करीब आ गई।
उसके जोर से पकड़ते ही उसके स्तन मेरे कोहनी से टच हुए, तो मेरे अन्दर एक करेंट सा उठा।
मैंने कुत्ता भगा दिया लेकिन फिर भी वो उसी तरह मुझे पकड़ कर चलती रही।
उस रात कुछ प्राब्लम की वजह से शहर की बिजली भी गुल थी.. घुप्प अँधेरा सा ही था।
कुछ और दूर चलने के बाद मैंने भी रिलॅक्स होकर उसका हाथ पकड़ लिया और बीच-बीच में उसके स्तनों को दबा देता था। उसे मेरी इस हरकत का पता चल गया, लेकिन उसने कुछ नहीं बोला।
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हम दोनों कुछ ही देर में उसकी बिल्डिंग के नीचे आ गए।
उसने कहा- आइए.. घर में चल कर पानी पी लीजिए।
मैंने कहा- नहीं आप अकेली हैं.. आपको दिक्कत होगी।
तो वो मुस्कुरा कर बोली- प्लीज़ थोड़ी देर में आप वापस चले जाइएगा ना.. वैसे भी रात है, इस वक्त तो सब लोग सो रहे हैं।
मुझे कुछ इशारा सा लगा, तो मैं उसके साथ उसके घर में चला गया.. उसने मुझे बैठाया और पानी दिया।
मुझे पानी देकर वो बोली- आप बैठिए, मैं चेंज करके आती हूँ।
मैं पानी पीकर ग्लास देने के लिए उसके पीछे बेडरूम में गया तो मैंने देखा कि वो अपनी साड़ी और ब्लाउज निकाल कर खड़ी थी और नाइटी ढूंड रही थी। मैं उसे पीछे से देखता ही रह गया।
नाइटी लेकर जैसे ही वो पीछे को घूमी, तो मुझे देखकर खुद को छुपाने लगी।
मैंने महसूस किया कि यदि उसका मन नहीं होता तो वो मुझ पर चिल्ला सकती थी, पर वो शर्मा रही थी। मुझे कुछ समझ में आने लगा था।
मैंने उसके पास आकर कहा- आप बहुत खूबसूरत हो।
वो धीरे से हँस कर बोली- आप यहाँ से चले जाइए ना, मैं वहीं आती हूँ।
मैं बोला- तुम्हारे पति यहाँ नहीं है ना!
तो बोली- हाँ.. लेकिन आप यहाँ से जाइए..
मैं बोला- ये सब यदि ठीक नहीं लग रहा है.. तो मैं चला जाता हूँ।
इतना बोल कर मैं वापस जाने को हुआ, तो वो बोली- रुकिए..
वो मेरे पास आई और बोली- प्लीज़ किसी को बताना मत..!
मैंने कहा- ओके..

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फिर मैं उसे अपनी बांहों में लेकर किस करने लगा.. उसके होंठ इतने सॉफ्ट थे कि मुझे बहुत अच्छा लगा।
वो भी मुझे सहयोग करने लगी। मैंने उसकी ब्रा को उतार दिया और उसके स्तन को जोरों से दबाने लगा।
तो उसके मुँह से ‘अहह..’ निकल गई.. वो बोली- प्लीज़ थोड़ी धीरे करो ना!
मैं उसके एक स्तन को अपने मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा। इसमें उसे बहुत मजा आ रहा था।
वो बोलने लगी- अह.. और जोर से चूसो.. जोर से.. प्लीज़ जान.. जोर से चूस लो इन्हें.. बहुत दिनों के बाद किसी ने इनको देखा है और ऐसे चूसा है, प्लीज़ जोर से चूसो.. इसका पूरा रस पीलो।
यह सुनते ही मैं और जोर से उसके स्तन चूसने लग़ा।
वो ‘आआअहह..’ करने लगी।
तभी मैंने एक हाथ से उसके पेटीकोट की डोरी खोल दी और अब वो मेरे सामने केवल पेंटी में थी। मैं उससे थोड़ी दूर जाकर उसे देखने लगा, वो शर्मा गई और मेरे करीब आकर मुझसे लिपटकर किस करने लगी।
अब उसने अपने एक हाथ से मेरी पैंट को खोल दिया और अंडरवियर के अन्दर हाथ डाल कर मेरे लंड से खेलने लगी।
मेरा खड़ा लंड जैसे ही उसके हाथ से टकराया.. वो बोली- ऊ..ये तो बहुत गर्म और रॉड जैसा कड़क हो गया है!
मैंने बोला- ये तुम्हारे लिए ही हुआ है जान..
अब मैं धीरे-धीरे उसके स्तन को चूसते हुए उसकी नाभि पर आया और वहाँ पर अपनी जीभ घुमाने लगा, वो सिसकारियाँ भरने लगी उम्म्ह… अहह… हय… याह… वो कामातुर होकर बोली- अह.. अब जल्दी से करो.. मुझसे रहा नहीं जा रहा है।

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मैं बोला- अभी तो शुरुआत है जान.. आगे-आगे देखो कि क्या-क्या होता है।
मैंने उसकी पेंटी उतार दी और उसकी क्लीन शेव चुत जन्नत के दरवाजे की तरह महकती हुई मेरे सामने थी। मैंने बैठे-बैठे ही उसकी एक टांग उठाकर अपने कंधे पर रखी और उसकी चुत पर चुम्मा धर दिया.. वो जोर से ‘आआह..’ करने लगी।
वो बोली- ये क्या कर रहे हो यार, मेरे पति तो कभी ऐसा नहीं करते हैं, तुमने तो आग सी लगा दी.. अह..
मैं बोला- कैसा लगा?
वो आँखें बन्द करके बोली- अह.. चूसते रहो डियर.. बहुत अच्छा लग रहा है।
वो अब जोर-जोर से सिसकारियाँ लेने लगी.. उसके मुँह से ‘आआहह..’ की आवाजों को सुनकर मुझे जोश आ गया। मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चुत को चूसने लगा। जैसे ही मैंने अपनी जीभ को उसकी चुत में डाली तो वो ‘ऊह.. आअहह.. करने लगी।
मैंने कहा- क्या हुआ?
वो बोली- दो महीने से भूखी हूँ.. इसलिए बेचैनी है।
फिर वो 69 में होकर मेरे लंड से खेलने लगी।
मैंने उससे कहा- इससे अब तुम अपने मुँह में ले लो।
वो बोली- नहीं..
फिर मेरे मनाने पर वो मान गई और मेरे लंड को कुल्फी की तरह चूसने लगी।
कुछ ही पलों में बोली- अह.. ये तो बहुत ही अच्छा लग रहा है।
मैं उसकी चुत चूसता रहा और इस बीच उसका पानी निकल गया।
मैं बोला- अब रूको.. तुम कैसे अपनी चुत में किस तरह से मेरा लंड लेना चाहती हो?
वो बोली- जैसी तुम्हारी मर्ज़ी..

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मैंने उससे कहा- ठीक है.. तुम मेरे ऊपर आ जाओ।
वो समझ गई और जल्दी से चुत उठाकर मेरे ऊपर चढ़ गई। वो अपने पैर फैला कर मेरे लंड को अपनी चुत में लेने लगी। उसकी चुत थोड़ी टाइट थी.. मेरे लंड अन्दर जाते टाइम उसके मुँह से ‘उउईई.. माँअमामा.. मर गई..’ की आवाज़ आई। वो आधा लंड अपनी चुत में लेकर रुक गई और बोली- अब इससे ज्यादा अन्दर नहीं जाएगा।
मैं बोला- अबे अभी तो आधा भी नहीं गया है।
तो बोली- ठीक है यार.. तुम ही डालो…
मैंने उसे बिस्तर पर लेटाकर उसकी टांगों के बीच में आ गया और धीरे-धीरे अपना लंड उसकी चुत में पेल दिया। फिर मैंने एक जोर से झटका दिया.. तो वो चिल्ला उठी और बोली- प्लीज़ यार धीरे-धीरे करो ना आहह.. लगती है।
मैं लगा रहा तो फिर दर्द भरी आवाजें उसके मुँह से आने लगीं। तो मैं थोड़ा रुक गया। कुछ पल बाद मैंने फिर से दूसरा झटका दिया और इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चुत में जड़ तक अन्दर चला गया।
वो चीख पड़ी.. तो मैं रुक गया और उसके मम्मों को चूसने लगा।
एक मिनट बाद उसे मजा आने लगा तो वो बोली- हाँ अब ठीक है अब शुरू करो..
मैं पिल पड़ा और धकापेल चुदाई शुरू हो गई। कुछ ही मिनट में चुदाई का खेल खत्म हो गया और हम दोनों एक-दूसरे से चिपक कर लेट गए।
दोस्तो, उस पूरी रात में मैंने उसे चार बार चोदा.. और उसकी सहमति से ही उसके साथ हुई घटना को आप सब तक पहुँचाया है।

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